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All Religious Books are available in Temple Stores. Our mission is to share the Good of Hinduism, Loving, Faith and Serving.
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ज़ियारत की गहराई को समझने के लिए इसके एक प्रसिद्ध अंश का हिंदी भावार्थ यहाँ प्रस्तुत है:
इसमें इमाम महदी (अतफ) की वह मशहूर पंक्ति आती है— "अगर ज़माना पीछे होता और मैं कर्बला में न हो सका, तो मैं सुबह-ओ-शाम आप पर आंसू बहाऊंगा और आंसुओं के बजाय खून रोऊंगा।"
"सलाम हो उस पर जिसके दिल के टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए। सलाम हो उस पर जिसके जिस्म की हड्डियों को घोड़ों से रौंदा गया। सलाम हो उस पर जिसका सिर दमिश्क के बाज़ारों में फिराया गया।"
यह ज़ियारत हमें सिखाती है कि हक़ और इंसाफ के लिए खड़े होने का मतलब क्या होता है。यह ज़ुल्म के आगे घुटने न टेकने की सबसे बड़ी मिसाल है。
: Many channels provide the full Ziyarat with Hindi subtitles , which is excellent for those who prefer listening (Areez) while following the meaning. 💡 User Tip
ज़ीयारत-ए-नाहिया क्या है? (What is Ziyarat e Nahiya?)
ज़ियारत-ए-नाहिया का अर्थ है "नाहिया की यात्रा"। नाहिया का अर्थ है "दूरी" या "दूर का स्थान"। यह यात्रा इमाम हुसैन के मकबरे पर जाकर की जाती है, जो कर्बला में स्थित है। यह यात्रा शिया मुसलमानों के लिए बहुत पवित्र मानी जाती है, क्योंकि इमाम हुसैन शिया मुसलमानों के तीसरे इमाम थे और उन्होंने अपने परिवार के साथ कर्बला में शहीद हो गए थे।