जेल से छूटने के बाद हिटलर ने लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव लड़ने का फैसला किया। 1929 की आर्थिक मंदी (Great Depression) ने जर्मनी को बर्बाद कर दिया था। हिटलर ने इस स्थिति का फायदा उठाया और रोजगार व गौरव वापस दिलाने का वादा किया। 1933 में उसे जर्मनी का चांसलर नियुक्त किया गया। राष्ट्रपति हिंडनबर्ग की मृत्यु के बाद, हिटलर ने सारी शक्तियां अपने हाथ में ले लीं और खुद को 'फ्यूहरर' (सर्वोच्च नेता) घोषित कर दिया। यहाँ पर यह सीरीज समाप्त होती है, जो द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत की नींव रखती है।
रॉबर्ट कार्लाइल का अभिनय इस सीरीज की सबसे बड़ी ताकत है। उनके हाव-भाव बिल्कुल असली हिटलर जैसे लगते हैं। hitler the rise of evil in hindi
"हिटलर: द राइज ऑफ इविल" केवल एक व्यक्ति की जीवनी नहीं है, बल्कि यह इस बात का एक गंभीर सबक है कि कैसे लोकतंत्र धीरे-धीरे तानाशाही में बदल सकता है। यह सीरीज इतिहास प्रेमियों के लिए एक मस्ट-वॉच (जरूर देखने योग्य) है। hitler the rise of evil in hindi
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1914 में जब प्रथम विश्व युद्ध (World War I) शुरू हुआ, तो हिटलर जर्मन सेना में भर्ती हो गया। युद्ध के दौरान उसने एक संदेशवाहक (Runner) के रूप में काम किया। उसे उसकी बहादुरी के लिए 'आयरन क्रॉस' (Iron Cross) पदक से भी नवाजा गया। जब 1918 में जर्मनी युद्ध हार गया, तो हिटलर को गहरा सदमा लगा। उसने इस हार के लिए जर्मन नेताओं, कम्युनिस्टों और यहूदियों (Jews) को जिम्मेदार ठहराया।
उन्हें जबरन 'घेटो' (Ghettos) और फिर यातना शिविरों (Concentration Camps) में भेजा गया।